
कोरोना की दवा बनाने का दवा करने वाले योग गुरु बाबा रामदेव बड़ी मुसीबत में फंस गये हैं. कोरोनिल को लेकर बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद पर एफआईआर दर्ज कराई गई है. बताया जा रहा है कि इस एफईआर में रामदेव और 4 अन्य के खिलाफ जयपुर में एफआईआर दर्ज कराई गई है.
वहीँ, बताया जा रहा है कि यह मामला बाबा रामदेव द्वारा बनाई गई कोरोना वायरस 'कोरोनिल' के गलत प्रचार को लेकर दर्ज कराया गया है. इस केस में आचार्य बालकृष्ण का नाम भी शामिल है.
इतना ही नहीं, बाबा रामदेव के खिलाफ चंडीगढ़ कोर्ट में हत्या की कोशिश और मिलावटी दवा बेचने का आरोप लगा है और उनके मुकदमा दर्ज कराया गया है. इससे पहले भी बिहार में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. यहां भी धोखा देने जैसे आरोप लगाए गये हैं.
दरअसल, बाबा रामदेव ने कोरोना की दवा बनाने का जोर-शोर से ऐलान किया और दावा किया कि यह 100% कोरोना का इलाज करेगी. उन्होंने बताया कि कोरोनिल 100% रिकवरी देगी. इतना ही नहीं उन्होंने ये तक कहा कि इस दवा के 280 लोगों पट ट्रायल किए गये हैं जिसमें 3 दिन में 65% और 7 दिन में 100% रिजल्ट मिले हैं.
उनके इस तरह के दवों के बाद भारत सरकार के आयुष मंत्रालय न खुद जांच के आदेश दिए और जानकारी मांगते हुए बाबा रामदेव को नोटिस थमा दिया. इतना ही नहीं बाबा रामदेव ने जिस फार्मसी में कोरोनिल दवा को बनाने का दवा किया यानी हरिद्वार की पतंजलि फार्मसी, वहां उत्तराखंड सरकार के आयुर्वेदिक मंत्रालय ने नोटिस भेजा है और पूछा है कि हमसे सर्दी-खांसी और बुखार की दवा का लाइसेंस लिया था, बताया क्यों नहीं कि कोरोना दवा बना रहे थे. साथ ही मंत्रालय ने पूछा है कि आखिर परमिशन किसने दी?
इसके बाद दवा बनाने में साथ देने वाले और निम्स यूनिवर्सिटी के संस्थापक डॉ बलबीर तोमर ने भी कहा कि उनकी यूनिवर्सिटी में कोई ट्रायल नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि मुझे इम्युनिटी बढ़ाने की दवा बताई गई थी, अब ये कोरोना की दवा कैसे बनी ये रामदेव जाने.

