कल सूर्यग्रहण लगेगा। श्रीमाता शीतला देवी श्राइन बोर्ड के पूर्व सदस्य और आचार्य पुरोहित संघ के अध्यक्ष पंडित अमरचंद भारद्वाज ने दावा किया है कि कल के सूर्यग्रहण के बाद कोरोना महामारी का संकट भी दूर होने लगेगा। यह सूर्यग्रहण सुबह 9.15 बजे से दोपहर 3.04 बजे तक रहेगा।
बता दें कि यह मंगल के नक्षत्र में पड़ने वाला ग्रहण है। भारत में देश के उत्तरी भाग के कुछ स्थानों (राजस्थान, हरियाणा तथा उत्तराखण्ड के हिस्सों) के संकीर्ण गलियारे में प्रात: ग्रहण की वलयाकार प्रावस्था दृश्यमान होगी जबकि देश के शेष भाग में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई देगा।
एमिटी यूनिवर्सिटी गुड़गांव में डिपार्टमेंट ऑफ एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रफेसर मनीष कुमार भारती ने बताया कि 1982 के बाद ये पहला मौका है जब चक्राकार सूर्य ग्रहण और ग्रीष्म संक्रांति एक ही दिन पर पड़ेंगी। अगली बार ऐसा अवसर 21 जून, 2039 को आएगा।
हिंदू धर्म के मुताबिक ग्रहण काल में कुछ चीजों को करने से मनाही होती है। ग्रहण के समय भोजन करने व बनाने दोनों का त्याग करना चाहिए। ग्रहण के बाद स्नान करना चाहिए। ग्रहण को खुली आंखों से देखने से परहेज करना चाहिए।
सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन तब घटित होता है जब चंद्रमा पृथ्वी एवं सूर्य के मध्य आ जाता है तथा ये तीनों एक ही सीध में होते हैं। वलयाकार सूर्य ग्रहण तब घटित होता है जब चंद्रमा का कोणीय व्यास सूर्य के कोणीय व्यास की अपेक्षा छोटा होता है जिसके परिणाम स्वरूप चंद्रमा सूर्य को पूर्णतया ढक नहीं पाता है। फलत: चंद्रमा के चतुर्दिक सूर्य चक्रिका का छल्ला दिखाई देता है ।
कुछ अफवाहें उड़ रही हैं कि 21 जून 2020 दुनिया का अंतिम दिन है। इस सूर्य ग्रहण को मायन कैलंडर से जोड़कर लोग इसे अंतिम दिन बता रहे हैं। मायन कैलंडर के अनुसार, दुनिया 21 दिसंबर 2012 को खत्म होनी थी। अब 21 जून 2020 को वही दिन होने की अफवाहें उड़ाई जा रही हैं, जिन्हें नासा ने पूरे तरीके से नकार दिया है।